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China नहीं बल्कि ये देश है India और PM मोदी की नजर में महाशक्ति

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FILE - In this Oct. 16, 2016, file photo, Indian Prime Minister Narendra Modi, left, and Chinese President Xi Jinping listen to a speech during the BRICS Leaders Meeting with the BRICS Business Council in Goa, India. India and China have faced off frequently since fighting a bloody 1962 war that ended with China seizing control of some territory. India’s army chief warned in July 2017 that India’s army was capable of fighting “2 1/2 wars” if needed to secure its borders. The dispute was discussed briefly without resolution by Xi and Modi on the sidelines of the G-20 summit in Hamburg, Germany. (AP Photo/Manish Swarup, File)

 

आज के इस दौर में किसी भी एक देश को महाशक्ति मानना संभव नहीं हो रहा है. दुनिया सालो से अमेरिका का ही प्रभुत्व रहा है. लें अब चीन भी इस प्रतियोगिता में उतर आया है.

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वैश्वीकरण के दौर में हर देश खुद को ताकतवर बनाने की कोशिश में जुटा हुआ है. सभी देश खुद को आर्थिक और सैन्य की तौर पर मजबूत बना रहे है. बहुत से देश कई नए आर्थिक धोरनो का अवलंब कर रहे है. इन धरनों से आर्थिक उन्नति कर रहे है. अपने सैन्य दलों को सक्षम बना रहे है. परमाणु उर्जा, मानवरहित लड़ाकू संधान, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस का प्रयोग अब हो रहा है. पहले महाशक्ति कहने पर सिर्फ अमेरिका का ही नाम सामने आता था. अमेरिका ने कई सालो तक दुनिया पर अपनी छांप बनाये राखी. किन्तु धीरे धीरे अन्य देश भी आगे आने लगे. इन देशो ने अमेरिका को टक्कर दी है. ऐसा नहीं है की इन देशो ने अमेरिका का स्थान हासिल कर लिया है. उनकी कोशिश अभी जारी है.

अमेरिका का स्थान दुनिया में अभी भी कायम है. लेकिन दुनिया के कुछ हिस्सों में लोग अब अमेरिका की बजाय कुछ दुसरे देशो के नाम महाशक्ति के रूप में ले रहे है. कुछ देशो में लोग चीन और रूस को महाशक्ति मान रहे है. विश्व में अमेरिका अभी भी आगे है मगर दुनिया का बड़ा हिस्सा चीन को उभरती ताकत के रूप में देखता है. दुनिया चीन को अगली बड़ी ताकत के रूप में देखती है. प्यू द्वारा किये गए एक सर्वे के मुताबिक, यूरोपियन यूनियन के 10 देशों में से ७ देशों का यह मानना है कि चीन एक प्रमुख आर्थिक शक्ति है. लेकिन, भारत अभी भी अमेरिका को ही विश्व की प्रमुख आर्थिक शक्ति मानता है. भारत के ४१ प्रतिशत लोगों के मन में चीन की प्रतिकूल छवि है.

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और सिर्फ 26 प्रतिशत भारतीय लोगों की नजर में ही चीन की सकारात्मक छवि है. भारत के साथ ही जापान और एशिया के कई अन्य हिस्से में और लातिन अमेरिका के भी कई देशों के नजर में चीन आज की आर्थिक महाशक्ति नहीं है. जबकि अधिकतर रूसी लोगों की नजर में चीन ही आज का लीडर है. गौर करने वाली बात यह है कि लंबे समय से अमेरिका के सहयोगी रहे ऑस्ट्रेलिया के लोगो में भी चीन को ही दुनिया की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है. 38 देशों में किए गए इस सर्वे में 47 प्रतिशत लोगों की की नजर में चीन के लिए सकारात्मक छवि है जबकि 37 प्रतिशत लोगों ने चीन के लिए नकारात्मक रवैया अपनाया है. चीन और अमेरिका के बीच एक समानता देखि गयी है.

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वो ये की दोनों देशों के नेताओं याने शी जिनपिंग और डॉनल्ड ट्रंप की छवि अधिकांश लोगों की नजर में नकारात्मक ही है. सर्वे में शामिल 53 प्रतिशत लोगों ने विदेशी मामलों को लेकर चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग पर अविश्वास दर्शाया है. और वही, 74 प्रतिशत लोगों ने ट्रंप पर थोड़ा या बिल्कुल ही न के बराबर भरोसा दर्शाया है. हर 5 में से 1 शख्स के मन में चिनफिंग को लेकर कोई राय ही नहीं है जबकि सर्वे में शामिल सिर्फ 8 प्रतिशत ही लोग ट्रंप को लेकर कोई राय नहीं रखते हैं. ट्रंप के मुकाबले जिनपिंग दुनिया में कम लोकप्रिय हैं. व्लादिमीर पुतिन को जिनपिंग से भी कम पसंद किया जाता है. रूस और नाइजीरिया के लोगों की नजर में चीन सबसे ऊपर है. यहां के 70 प्रतिशत लोगों ने चीन के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया है.