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NRC पर राजनाथ सिंह का फैसला

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असम में एनआरसी की मसौदा रिपोर्ट पर जारी विवाद के बीच देश में अवैध रूप से रहने वाले रोहिंग्या को लेकर मंगलवार को लोकसभा में जबर्दस्त हंगामा हुआ. विपक्ष ने रोहिंग्या को लेकर जारी सरकार की नीति पर सवाल उठाए जबकि सरकार ने कहा कि वह रोहिंग्या की घुसपैठ पर रोक लगाएगी.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ बता दे की संसद में रोहिंग्या के मुद्दे पर एक बार फिर विपक्ष और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला. ऐसे में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि रोहिंग्या के घुसपैठियों कि पहचान कि जा रही है. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पहचान होते ही रोहिंग्या को वापस भेज दिया जाएगा.

खबरों की माने राजनाथ सिंह के जूनियर राज्यमंत्री किरण रिजिजु ने साफ कर दिया कि रोहिंग्या शरणार्थी नहीं हैं, बल्कि अवैध घुसपैठिये है. उन्हें शरणार्थियों की सुविधाएं नहीं दी जा सकती है. लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान अरविंद सावंत, रामस्वरूप शर्मा और सुगत बोस के पूरक प्रश्नों के उत्तर में राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल और असम राइफल्स को सजग किया गया है ताकि म्यांमार से लगी सीमा से रोहिंग्या भारत में प्रवेश नहीं कर सकें.

बता दे की इस बीच, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसद एस बोस ने रोहिंग्या पर सरकार की नीति को लेकर सवाल उठाया. बोस ने पूछा कि विदेश मंत्रालय बांग्लादेश में रोहिंग्या के लिए ‘ऑपरेशन इंसानियत’ चला रहा है. भारत में ४०,००० रोहिंग्या है. बोस ने कहा कि क्या हम केवल बांग्लादेश में रहने वाले रोहिंग्या के लिए इंसानियत दिखाएंगे.

जानकारी के मुताबिक़ टीएमसी सांसद के सवालों का जवाब राजनाथ सिंह के जूनियर राज्यमंत्री किरन रिजिजू ने दिया. रिजिजू ने टीएमसी सांसद के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत दुनिया का शायद पहला देश है जिसने शरणार्थियों के प्रति इस तरह का नरम रुख अपनाया है. हमने म्यांमार से कहा है कि रोहिंग्या के लौटने पर हम उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद करेंगे. रिजिजू के अनुसार राज्यों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि रोहिंग्या घुसपैठिये किसी तरह का सरकारी दस्तावेज हासिल नहीं कर सकें.