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PM मोदी के इस बड़े कारनामे के बाद, शिवसेना और NCP रह गए हक्के-बक्के

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कर्नाटक चुनाव के नतीजों के बाद बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभर कर आई है. वैसे देखा जाए तो कर्नाटक चुनाव के नतीजों का असर देशभर के कई राज्यों में नजर आ रहा है. लेकिन कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों का असर अगर कहीं सबसे ज्यादा हुआ हो, तो वो है महाराष्ट्र.

 

कर्नाटक चुनाव के नतीजों के बाद बीजेपी कितनी बड़ी पार्टी है यह अंदाज लगाए जा रहे है. ऐसे में उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवरा की एनसीपी के सुर बदलते दिखाई दे रहे हैं. खबरों की माने तो कर्नाटक चुनाव में बीजेपी को मिली जीत के कारण शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने ना सिर्फ बीजेपी को बधाई दी, बल्कि ये भी कहा कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, उसे सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए. जो शिवसेना कल तक बीजेपी को पानी पी-पी कर कोस रही थी वह अब बीजेपी की तारीफ़ करते नजर आ रही है. महाराष्ट्र की राजनीति पर पैनी नजर रखने वालों की मानें तो कर्नाटक के नतीजों से उद्धव को इस बात का एहसास हो चुका है कि मोदी लहर अभी इतनी कम नहीं हुई है, जितना वो सोच रहे थे. इसका असर हाल ही में सूबे में होने वाले लोकसभा उपचुनाव में भी देखने को मिल सकता है.

बता दे कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने १०४ सीटों पर जाट हासिल कर कर्नाटक में अपनी सरकार बनाई है हाला की बहुमत ना होने के कारन बीजेपी को बहुमत साबित करने को कहा गया है. कर्नाटक के गवर्नर ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया था. जानकारी के मुताबिक़ बता दे की पालघर सीट पर बीजेपी के अलावा शिवसेना ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है. लेकिन कर्नाटक चुनाव के बाद शिवसेना को हार का डर सताने लगा है. हाला कि उद्धव पार्टी के प्रत्याशी का प्रचार तो कर रहे हैं, लेकिन संभलकर. खबरों की माने वो इस प्रचार में मोदी का नाम नहीं ले रहे, बल्कि राज्य सरकार पर बोल रहे हैं. वहीं विरोधियों को गोदिया भंडारा सीट पर भी बीजेपी की जीतने का एहसास होने लगा है.

कर्नाटक चुनाव के नतीजे सामने आने के साथ ही सूबे के कांग्रेस नेता भी हरकत में आए गए और एनसीपी नेताओं संग बैठक कर ये कहा कि विधान परिषद सहित सारे चुनाव एनसीपी से मिलकर लड़ेंगे यह जानकारी मिली है. इसल में कांग्रेस नेताओं को लगने लगा है कि कर्नाटक चुनाव के बाद अब कांग्रेस की ताकत बारगेनिंग की नहीं रही, तो जो पवार कहेंगे वही मान लिया जाएगा ऐसा सूत्रों ने बताया है. जानकारी के मुताबिक़ आपको यह बात बता दे की शरद पवार भी नतीजे के ही दिन दिल्ली पहुंच गये है. उसके मुताबिक उनकी जल्द ही राहुल गांधी से मुलाकात हो सकती है. अब ऐसे में यह बात जाहिर है की कर्नाटक के नतीजों का असर पड़ोसी महाराष्ट्र की राजनीति पर लंबे समय तक रहेगा इसमें कोई आशंका नहीं.