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PM मोदी ने बंगले की तोड़फोड़ करनेवाले अखिलेश पर लिया ये सख्त एक्शन, बाकी नेता भी हुए हैरान

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देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश पिछले कई दिनों से टोटी पॉलिटिक्स में उलझा हुआ है. सरकारी बंगले को खाली करने को लेकर हो रही आलोचनाओं को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लगाये गये आरोपों पर पलटवार करते हुए राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि सच्चाई सामने आ रही है तो ‘खिसियान बिल्ली खंभा नोचे’ वाली कहावत चरितार्थ हो रही है.

उत्तर प्रदेश के छह में से पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अपने सरकारी बंगले खाली कर दिए है. लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खाली किए बंगले पर मची रार थमने का नाम नहीं ले रही है. चार-विक्रमादित्य मार्ग स्थित अखिलेश यादव के बंगले पर ४० करोड़ के खर्च की बात कही जा रही है, जबकि सरकारी फाइलों में स्पष्ट है कि बंगले पर ९० लाख रुपया ही खर्च हुआ है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब बंगले पर सरकार ने ९० लाख रुपये ही खर्च किये तो ४० करोड़ रुपये कहां से आये. अखिलेश पर आरोप लग रहे है कि आवास खाली करने से पहले उन्होंने बंगले में तोड़फोड़ की और कीमती सामान ले गये. राज्यपाल राम नाईक ने इसे गंभीर मानते हुए कार्रवाई के लिये सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा तो अखिलेश ने प्रेसवार्ता कर योगी सरकार पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया। राज्यपाल राम नाईक पर भी निशाना साधते हुए अखिलेश ने कहा कि अभी तक जो मौन रहते थे, अब वो भी बोल रहे है. बता दे की अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने बंगले में अपने पैसे से लाइट लगवायी थी, वह समाजवादी लाइट है. उन्होंने कहा कि उन्होंने मंदिर भी खुद बनवाया, उसमें देवी-देवता की प्रतिमा लगवायी, जिसे इन्होंने गंगा जल से नहलाया.

अखिलेश ने कहा कि अगर नहीं तो कोई सरकारी अधिकारी इसका बिल दे दे. वहीं, उत्तरप्रदेश सरकार के प्रवक्ता और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा की अखिलेश यादव को खुद आयकर ​विभाग को यह बताना चाहिए कि बंगले में लगाने के लिए पैसा उनके पास कहां से आया. इसके अलावा उन्होंने तंज कसते हुए कहा है कि ‘‘जिस दीवार को तोड़ा गया, उसके पीछे क्या छिपाया गया था, इसकी जानकारी भी दें.’ सिंह ने आज अखिलेश की प्रेस कांफ्रेंस के तुरंत बाद आननफानन में बुलायी गयी पत्रकार वार्ता में कहा,‘‘अखिलेश कह रहे हैं कि उन्होंने बंगले में निर्माण कार्य अपने खुद के पैसे से करवाये है. अब आयकर विभाग को चाहिए कि वह इस मामले की जांच करे कि जो पैसे मकान में लगाए जाने की बात वह कर रहे है उसका कोई हिसाब किताब भी है या नहीं.‘‘ उन्होंने कहा कि अखिलेश ने आज जिन शब्दों का चयन किया, वह उन्हें शोभा नहीं देता. हम उसकी निंदा करते है.

सिंह ने कहा, ‘‘मैं एक मुहावरा कहूंगा‘‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे.‘‘ राज्यपाल राम नाइक के एक पत्र को लेकर अखिलेश की आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने कहा कि राज्यपाल एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति है, हम सबको उनका सम्मान करना चाहिये. मंत्री ने कहा कि अब जो राज्यपाल ने पूछा है उसमें किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए. अखिलेश जिस घर में रह रहे थे वह कोई निजी घर नहीं है वह राज्य सम्पत्ति का है. राज्य सम्पत्ति विभाग तोड़फोड़ को लेकर अब अखिलेश यादव को नोटिस देने की तैयारी में है. विभाग का कहना है कि अखिलेश के बंगले की फॉल्स सींलिंग तोड़कर बिजली के सामान, एसी के स्विच बोर्ड, किचन की सिंक, बाथरूम की फिटिंग, टोटियां तक निकाल ली गई है. इतना ही ही नहीं बंगले में बना स्विमिंग पूल, जिम स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स और साइकिल ट्रैक को भी तोड़ दिया गया है. अखिलेश यादव कह रहे हैं कि उन्होंने अपनी शौक से अपने खर्च पर बंगला सजवाया था, इसलिये जो मेरा सामान था मैं वो ले गया. फिर भी राज्य संपत्ति विभाग वो चीजें बताये, जिन्हें मैं ले गया. मैं वापस कर दूंगा.

सिंह ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों के मकान खाली करने के जो आदेश आये थे वह सरकार के नहीं बल्कि उच्चतम न्यायालय के आदेश थे. सिंह ने यह भी कहा कि आज संवाददाता सम्मेलन में अखिलेश का जो हाव-भाव था, वह उसी तरह था जब ‘चोर की दाढ़ी में तिनका होता है’ तो वह बौखलाकर कुछ न कुछ बोल जाता है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने साफ किया कि अखिलेश ने आरोप लगाया कि एक आईएएस अधिकारी बंगला खाली करने के बाद वहां गए थे तो मैं यह साफ कर दूं कि कोई अधिकारी नहीं गया था बल्कि यह बंगला राज्य संपत्ति विभाग के अंतर्गत आता है इसलिए राज्य संपत्ति विभाग के अधिकारी कर्मचारी जरूर गए थे. सिंह ने कहा कि राज्यपाल के पत्र के बाद संपत्ति विभाग के अधिकारी इस मामले की जांच करेंगे. इस मामले में अलग से कोई समिति बनाने की जरूरत नहीं है.