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RSS में प्रणब दा के जाने से बीजेपी को मिला ये बडा तोहफा, कांग्रेस में मची हडकंप

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कांग्रेस नेता और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय जाने के कई लाभ भाजपा और संघ को मिलते दिखाई दे रहे हैं. कहने को तो तर्क दिए जा सकते हैं कि मोहन भागवत और प्रणब मुखर्जी के बीच घनिष्ठता है. वो एक-दूसरे वो व्यक्तिगत रूप से पसंद करते हैं. प्रणब दा ने तो मोहन भागवत को राष्ट्रपति रहते रिसीव करने के लिए प्रोटोकॉल तक तोड़ा है.

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में जाने से भाजपा को एक बड़ा लाभ हुआ है.भाजपा को पता है कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में वो २०१४ का प्रदर्शन दोहरा पाने की स्थिति में नहीं हैं. सूत्र बताते हैं कि भाजपा १५० सीटों पर लोकसभा प्रत्याशी बदल सकती है. ८० सीटों पर उन्हें हार का डर है. लेकिन ५० सीटों पर उन्हें जीत की उम्मीद भी है. इन उम्मीद वाले राज्यों में दो नाम ओडिशा और बंगाल के भी हैं.प्रणब दा का बंगाली होना और संघ के मंच से बोलना भाजपा के लिए बंगाल में अलग जादू की तरह काम करेगा. इसे बंगाली अस्मिता और सम्मान से जोड़कर प्रचारित करने में भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ेगी. ओडिशा के लिए मोदी पहले ही मन बना चुके हैं कि अगले लोकसभा चुनाव में वो संभवतः पुरी से चुनाव लड़ें.

अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा लाभ दोनों ही राज्यों में भाजपा को मिल सकता है. अमित शाह की गणित बंगाल से २२ सीटों की उम्मीद लगाए हुए हैं.प्रणब दा की संघ के कार्यक्रम में उपस्थिति असंतुष्ट कांग्रेसियों के लिए संकेत भी है और संदेश भी. संघ और भाजपा जिस तरह से प्रणब दा की इस कार्यक्रम में जाने के बाद से तारीफ कर रहे हैं वो कांग्रेस के असंतुष्टों और वरिष्ठों को संदेश देना है. पहले ही कई बड़े कांग्रेसी चेहरे भाजपा में शामिल हो चुके हैं.भाजपा और संघ यह भी चाहते हैं कि कांग्रेस उनके बिछाए जाल के हिसाब से खेले और बोले और उसमें उलझती जाए. ऐसे समय में जबकि कांग्रेस को मुखर होकर सत्तापक्ष को घेरना चाहिए, वो खुद भाजपा और संघ के चक्रव्युह में उलझती नज़र आ रही है. सारी बहस का एजेंडा संघ औऱ भाजपा तय कर रहे हैं. विपक्ष फिलहाल उसी जलकुंभियों के तालाब में गोते खाता नज़र आ रहा है.